Skyroot Vikram-1 लॉन्च: भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट सफल, PM मोदी ने दी बधाई
श्रीहरिकोटा। स्काईरूट एयरोस्पेस ने आज विक्रम-1 रॉकेट के जरिए भारत के निजी स्पेस इतिहास की नई इबारत लिख दी। चार चरणों वाला यह रॉकेट सफलतापूर्वक उड़ा और निर्धारित कक्षा में पहुंचकर 6 पेलोड तैनात कर दिए।
रॉकेट ने लिफ्ट-ऑफ के बाद सभी चरणों का अलग होना और पेलोड फेयरिंग का सफलतापूर्वक अलग होना पूरा किया। मिशन आगमन के तहत यह टेस्ट फ्लाइट मुख्य रूप से कंपनी की तकनीकी क्षमताओं को साबित करने के लिए थी।
विक्रम-1 मिशन की सफलता
लॉन्च के कुछ मिनट बाद रॉकेट के ऊपरी चरण ने 450 किलोमीटर की निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) हासिल कर ली। कंपनी ने सभी प्रमुख माइलस्टोन्स को पूरा होने की पुष्टि की।
इस मिशन में शामिल पेलोड्स में लैब-ग्रोन डायमंड और टीम के संदेश भी शामिल थे। रॉकेट की कुल लंबाई करीब 24 मीटर बताई गई है।
स्काईरूट के मुताबिक, यह लॉन्च छोटे उपग्रहों के लिए तेज और ऑन-डिमांड लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है।
मिशन आगमन का विवरण
मिशन की तैयारी पिछले कई दिनों से चल रही थी। लॉन्च विंडो 12 जुलाई से 4 अगस्त तक तय की गई थी। आज थोड़ी देरी के बाद लॉन्च हुआ, लेकिन पूरी तरह सफल रहा।
सभी स्टेज सेपरेशन स्मूथ रहे और रॉकेट ने अपनी निर्धारित ट्रैजेक्टरी का पालन किया। ISRO की सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए स्काईरूट ने यह उपलब्धि हासिल की।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर इस सफलता पर बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्पेस जर्नी में नया फ्रंटियर बताया।
Spoke to the team of Skyroot Aerospace and congratulated them on the successful launch of Vikram-1.
This is a defining moment in India’s space journey. The growing participation of our private sector is opening new frontiers and accelerating innovation.
This achievement will… pic.twitter.com/epWjOY8yKa
— Narendra Modi (@narendramodi) July 18, 2026
पीएम मोदी ने लिखा कि विक्रम-1 युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ इच्छाशक्ति और उद्यमशीलता का प्रतीक है। स्पेस सेक्टर में सुधारों ने नई संभावनाएं खोली हैं।
उन्होंने पूरे स्काईरूट टीम को शुभकामनाएं दीं और युवाओं से इस मिशन को फॉलो करने की अपील की।
स्काईरूट एयरोस्पेस की यात्रा
स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना 2018 में पवन कुमार चंदना और नागा भारथ डाका ने की थी। कंपनी हैदराबाद में स्थित है और पहले 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कर चुकी है।
कंपनी ने हाल ही में बड़े निवेश हासिल किए हैं और अब नियमित ऑर्बिटल लॉन्च की तैयारी में है। विक्रम-1 के बाद विक्रम-2 का विकास चल रहा है।
स्काईरूट का लक्ष्य छोटे उपग्रहों के लिए सस्ती और तेज लॉन्च सेवाएं मुहैया कराना है।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए मील का पत्थर
यह सफल लॉन्च भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल करता है जहां निजी कंपनियां ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने में सक्षम हैं। इससे पहले यह क्षमता मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों के पास थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय स्पेस इंडस्ट्री को नई गति मिलेगी। छोटे स्टार्टअप्स और उपग्रह कंपनियों को फायदा होगा।
स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदना ने इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।
यह उपलब्धि ISRO की नींव पर खड़े निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। भविष्य में और अधिक ऐसे मिशनों की उम्मीद है।
