बलिया में पुलिस हिरासत में कामजी गोंड की मौत, छह आरोपियों पर मर्डर केस

बलिया में पुलिस हिरासत में कामजी गोंड की मौत, छह आरोपियों पर मर्डर केस

UP Crime | बलिया जिले में पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के मामले ने पूरे जिले में तनाव पैदा कर दिया है। दलित समुदाय के कामजी गोंड की मौत को लेकर उनके परिजनों और स्थानीय लोगों ने तीखा विरोध प्रदर्शन किया।

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव में 42 वर्षीय कामजी गोंड की कथित पुलिस हिरासत में मौत का मामला सामने आया है। 8 जुलाई को पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए उठाए गए कामजी को मारपीट के बाद बेहोशी की हालत में छोड़ने का परिजनों का आरोप है। 10 जुलाई को वाराणसी के बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने मृतक के बेटे की शिकायत पर छह लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।

घटनाक्रम क्या था?

7 जुलाई 2026 को गायघाट गांव में कामजी गोंड के बेटे विशाल का गांव के दुकानदार सूरज कन्नौजिया के साथ मीट खरीदने को लेकर विवाद हो गया। इस विवाद के बाद दुकानदार की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

अगले दिन 8 जुलाई को रेवती थाने के सब-इंस्पेक्टर और सिपाही विशाल को ढूंढते हुए उनके घर पहुंचे। विशाल के न मिलने पर उन्होंने उसके पिता 42 वर्षीय कामजी गोंड को जबरन थाने ले जाने के लिए साथ लिया।

परिजनों का आरोप

परिजनों का कहना है कि पुलिस ने कामजी गोंड के साथ पूछताछ के दौरान बेरहमी से मारपीट की। मारपीट के बाद उन्हें बेहोशी की हालत में गायघाट गांव के एक बगीचे के पास छोड़ दिया गया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उन्हें वाराणसी के बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया, जहां 10 जुलाई की रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मौत के बाद परिजनों और दलित समुदाय के लोगों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया।

पुलिस का पक्ष

बलिया पुलिस ने मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का बयान है कि पूछताछ के दौरान कामजी गोंड को सांस लेने में तकलीफ हुई, जिसके बाद उन्हें एक स्थानीय जिम्मेदार व्यक्ति को सकुशल सौंप दिया गया था।

प्रशासन की कार्रवाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बलिया प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। मृतक के बेटे विशाल की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत छह लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

आरोपी इस प्रकार हैं:

  • सब-इंस्पेक्टर सचिन सरोज
  • सिपाही अंकित सिंह
  • गायघाट के ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह उर्फ लालू
  • उनके ड्राइवर मनीष यादव
  • दुकानदार सूरज कन्नौजिया (साथ ही एक अन्य व्यक्ति)

बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने लापरवाही के आरोप में सब-इंस्पेक्टर सचिन सरोज और सिपाही अंकित सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रेवती थाना प्रभारी राज केशर सिंह को हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

मजिस्ट्रेट जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट

बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह के निर्देश पर मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अनिल कुमार को एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस उपाधीक्षक मंजरी राव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं, लेकिन मौत का सटीक कारण स्पष्ट न होने पर डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित रख लिया है। आगे फोरेंसिक जांच की जाएगी।

पुलिस की कई टीमें फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस मामले ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का 14 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 17 जुलाई 2026 को गायघाट गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करेगा और शोक संवेदना व्यक्त करेगा।

स्थानीय स्तर पर विपक्षी दलों ने इस घटना पर सरकार से जवाब मांगा है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

बलिया पुलिस हिरासत मौत का यह मामला वर्तमान में पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

pandayadhira

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