प्रसिद्ध तमिल संगीतकार और गायक देवा का शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में निधन हो गया। 75 वर्षीय देवा को सुबह सीने में दर्द की शिकायत हुई। उन्हें सूर्या अस्पताल, कोडम्बक्कम ले जाया गया, जहां पहुंचते ही उनकी नब्ज नहीं चल रही थी। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। देवा को तमिल सिनेमा में गाना म्यूजिक को मुख्यधारा में लाने का श्रेय दिया जाता है।
चेन्नई के सूर्या अस्पताल में शनिवार सुबह संगीतकार देवा का निधन हो गया। उनका पूरा नाम देवनेसन चोक्कलिंगम था। वे ‘थेनिसाई थेंद्रल देवा’ के नाम से लोकप्रिय थे।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, देवा सुबह सीने में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे। पहुंचते समय उनकी नब्ज नहीं चल रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। लगभग एक दशक पहले उन्होंने बाईपास सर्जरी करवाई थी।
देवा का जन्म 20 नवंबर 1950 को चेन्नई के मायलापुर में हुआ था। शुरुआती दिनों में उन्होंने तमिलनाडु सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग में काम किया। बाद में वे फिल्म संगीत की दुनिया में आए।
उनकी पहली फिल्म 1986 की ‘मट्टुक्कारा मन्नारु’ थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन उसके गाने बाद में लोकप्रिय हुए। 1989 की ‘मनसुकेथा महरासा’ और 1990 की ‘वैकासी पोरंथचू’ ने उन्हें पहचान दिलाई। ‘वैकासी पोरंथचू’ के लिए उन्हें तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड मिला।
देवा की असली पहचान 1990 के दशक में बनी। उस समय तमिल सिनेमा में इलैयाराजा और एआर रहमान का दबदबा था। ऐसे में देवा ने अपना अलग रास्ता चुना। उन्होंने चेन्नई की गलियों में प्रचलित गाना म्यूजिक को मुख्यधारा के सिनेमा में जगह दी।
रजनीकांत की फिल्मों में देवा का संगीत खास चर्चा में रहा। ‘अन्नामलाई’, ‘बाशा’ और ‘अरुणाचलम’ जैसी फिल्मों के गाने और बैकग्राउंड स्कोर आज भी याद किए जाते हैं। ‘बाशा’ का टाइटल म्यूजिक और इंट्रो सीन का स्कोर रजनीकांत की स्क्रीन इमेज का हिस्सा बन गया।
‘अन्नामलाई’ के गाने ‘कोंदैयिल तझंबू’ ने खूब धूम मचाई। ‘बाशा’ का ‘बाशा बाशा’ रिफ्रेन सिनेमा हॉल में गूंजता था। देवा ने रजनीकांत की कई फिल्मों के टाइटल कार्ड म्यूजिक को भी आकार दिया।
मेलोडी में भी देवा पीछे नहीं थे। 1995 की फिल्म ‘आसई’ के गाने ‘कोंजा नाल’, ‘मीनाम्मा’ और ‘पुलवेली पुलवेली’ आज भी सुने जाते हैं। ‘कादल कोट्टई’, ‘नेरुक्कु नेर’, ‘कुशी’, ‘वाली’ और ‘अव्वई शनमुगी’ जैसी फिल्मों में भी उनका संगीत हिट रहा।
देवा ने सिर्फ तमिल ही नहीं, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी संगीत दिया। उनका करियर करीब चार दशक लंबा रहा। उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया। 1996 में अकेले उन्होंने 36 फिल्मों का संगीत तैयार किया था।
उन्हें तमिलनाडु सरकार का कलाइमामणि पुरस्कार भी मिला। गाना म्यूजिक के अलावा उन्होंने भक्ति संगीत और शास्त्रीय छूआव वाले गाने भी बनाए। कई मंदिरों में उनके भक्ति गाने आज भी सुनाए जाते हैं।
देवा के बेटे श्रीकांत देवा भी संगीतकार हैं। उनके भाई सबेश-मुरली संगीत की दुनिया में सक्रिय रहे। भतीजे जय अभिनेता हैं।
निधन की खबर मिलते ही तमिल सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सुपरस्टार रजनीकांत टी नगर स्थित देवा के आवास पहुंचे और अंतिम दर्शन किए। वे भावुक नजर आए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने शोक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि देवा लोकगीतों के जरिए आम लोगों के दिलों को छूने वाले अनोखे संगीतकार थे। उनका निधन तमिल सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है।
தமிழ் திரையுலகின் இசை உலகில் தனக்கென ஒரு முத்திரை பதித்த இசையமைப்பாளர் தேவா சார் அவர்களின் மறைவு மிகுந்த வேதனை அளிக்கிறது.
அவரது இசையும், பாடல்களும் என்றும் நம் நினைவுகளில் வாழும்.
ஆழ்ந்த இரங்கல் 🙏🏽 https://t.co/L4S1mTVVl1
— VijaySethupathi (@VijaySethuOffl) October 17, 2026
अभिनेता कमल हासन ने उन्हें ‘प्रिय भाई’ कहकर याद किया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर समेत कई राजनीतिक नेताओं और फिल्म हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। इलैयाराजा ने शनिवार को अपनी स्टूडियो में चल रहे काम स्थगित कर दिए।
देवा का पार्थिव शरीर टी नगर स्थित उनके आवास पर रखा गया, जहां फिल्म जगत के लोग और प्रशंसक अंतिम दर्शन करने पहुंचे। उनकी अंतिम यात्रा को लेकर राज्य सम्मान दिए जाने की भी खबर है।
देवा की संगीत यात्रा तमिल सिनेमा के एक खास दौर को दर्शाती है। उन्होंने गाना जैसे लोक संगीत को बड़े पर्दे पर स्थापित किया और रजनीकांत जैसी हस्तियों के साथ मिलकर यादगार धुनें बनाईं। उनके निधन के साथ दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत का एक अध्याय समाप्त हो गया है।
उनके गाने और बैकग्राउंड स्कोर अभी भी सुनने वालों के मन में जिंदा हैं।