बलिया। बांसडीह नगर पंचायत क्षेत्र में एक गरीब परिवार की बेटी की शादी टूटने की कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि की त्वरित पहल और वर पक्ष की संवेदनशीलता ने पूरी तस्वीर बदल दी। बुधवार को दुर्गा मंदिर में राधिका और अंजय ने सात फेरे लिए। नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने परिवार की आर्थिक मदद की और वर पक्ष ने दहेज लेने से इनकार कर दिया।
बलिया के बांसडीह में इंसानियत की मिसाल कायम हुई है। आर्थिक तंगी और पिता की गंभीर बीमारी के कारण बेटी की शादी अधर में लटक गई थी, लेकिन कुछ घंटों में हालात बदल गए। नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह की पहल से बुधवार को सादगी भरे माहौल में विवाह संपन्न हो गया।
नगर क्षेत्र निवासी अवधेश राजभर अपनी बेटी राधिका की शादी नरही थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर निवासी अंजय राजभर के साथ फरवरी 2027 में तय की थी। लेकिन कंपनी में काम करते समय लोहे के छड़ों का बंडल गिरने से अवधेश गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले से टीबी से पीड़ित अवधेश की हालत और बिगड़ गई। पत्नी के पहले निधन के कारण परिवार पहले ही आर्थिक संकट में था।
इसी स्थिति में बेटी की शादी टूटने की नौबत आ गई। बुधवार सुबह पड़ोसी चिंता देवी ने इस पूरे मामले की जानकारी नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह को दी।
सुनील कुमार सिंह ने तुरंत परिवार से संपर्क किया। उन्होंने कहा, “अब इस बेटी की शादी की चिंता मत कीजिए, यह हमारी जिम्मेदारी है।” इसके बाद उन्होंने कपड़े, मिठाई, बक्सा और गृहस्थी का आवश्यक सामान उपलब्ध कराया। उनकी त्वरित मदद से शादी की तैयारियां पूरी हो गईं।
वर पक्ष ने भी सराहनीय भूमिका निभाई। अंजय राजभर के परिवार ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने फैसला किया कि विवाह पूरी सादगी से बिना किसी दिखावे के संपन्न होगा। दोनों पक्षों की सहमति से बांसडीह स्थित दुर्गा मंदिर को विवाह स्थल चुना गया।
दुर्गा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राधिका और अंजय ने सात फेरे लिए। परिजनों की मौजूदगी में यह विवाह संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने इस घटना को सामाजिक सहयोग और दहेज मुक्त विवाह की प्रेरणादायक मिसाल बताया।
यह घटना बलिया जिले में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करती है। पिता अवधेश राजभर की बीमारी और गरीबी के बीच बेटी का भविष्य संकट में था, लेकिन पड़ोसी की सूचना, जनप्रतिनिधि की पहल और वर पक्ष की समझदारी ने नई शुरुआत दी।
स्थानीय स्तर पर ऐसी घटनाएं समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं। दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़े होने की मिसाल यह विवाह बन गया है।
बांसडीह क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग कह रहे हैं कि यदि समाज ऐसे सहयोगी कदम उठाए तो कई परिवारों की मुश्किलें आसानी से हल हो सकती हैं।