बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के दुबहड़ क्षेत्र स्थित किशुनीपुर गांव में रविवार को बलिदानी अमित तिवारी की 16वीं पुण्यतिथि पर भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के शहीद जवान अमित तिवारी ने 26 जुलाई 2010 को असम में उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज आयोजित सर्वदलीय सभा में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने उनकी स्मृति में दुबहड़ से लखनऊ तक नई बस सेवा शुरू करने की घोषणा की, जिसका नामकरण बलिदानी अमित तिवारी के नाम पर किया जाएगा।
श्रद्धांजलि सभा में सर्वदलीय भागीदारी
बलिया के दुबहड़ इंटर कॉलेज परिसर के निकट रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं, बुजुर्गों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधियों की भारी संख्या में उपस्थिति रही। सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी और जवान भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद अमित तिवारी के चित्र पर माल्यार्पण और गार्ड ऑफ ऑनर से हुई। सभा के दौरान उनके पिता शोकहरण तिवारी और परिवार के अन्य सदस्यों का सम्मान किया गया। एसएसबी के जवानों ने परिवार के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
परिवहन मंत्री ने की बस सेवा की घोषणा
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अमित तिवारी ने बहुत कम उम्र में देश की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। वे न केवल अपने माता-पिता और बलिया क्षेत्र बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव बन गए हैं। उनके साहस की याद आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
इस अवसर पर मंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की एक नई बस सेवा बलिया के दुबहड़ इंटर कॉलेज के निकट से शुरू होकर सीधे लखनऊ तक चलाई जाएगी। इस पूरी सेवा का आधिकारिक नामकरण ‘बलिदानी अमित तिवारी’ के नाम पर किया जाएगा।
इस कदम से क्षेत्र के लोगों को राजधानी आने-जाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही दैनिक यात्रा करने वाले यात्रियों और युवा पीढ़ी को शहीद के बलिदान और राष्ट्र सेवा की याद निरंतर बनी रहेगी।
अमित तिवारी की शहादत की गाथा
अमित तिवारी उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के दुबहड़ क्षेत्र स्थित किशुनीपुर गांव के तिवारी टोला के रहने वाले थे। वे सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 15वीं वाहिनी में तैनात थे। यह वाहिनी असम के बोंगाईगांव में स्थित थी।
वर्ष 2010 में असम का यह क्षेत्र उग्रवादी गतिविधियों से प्रभावित था। 26 जुलाई 2010 को कुहीघाट वन बीट हाउस क्षेत्र में सुरक्षाबलों की टीम गश्त पर थी। घने जंगलों का फायदा उठाकर उग्रवादियों ने घात लगाकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
इस अचानक हुए हमले में घिरने के बावजूद अमित तिवारी और उनके साथियों ने पीछे हटने के बजाय अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने जवाबी फायरिंग करते हुए कई उग्रवादियों को पीछे हटने पर मजबूर किया। इस मुठभेड़ में अमित तिवारी के साथ उनके जांबाज साथी किशोर कुनाल (सहायक कमांडेंट), प्रताप सिंह (उप निरीक्षक) और ग्यालजु शेरपा (आरक्षी चालक) ने भी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
इस असाधारण वीरता के लिए भारत सरकार ने अमित तिवारी को मरणोपरांत पराक्रम पदक से अलंकृत किया।
गांव में स्मृति और वार्षिक श्रद्धांजलि
शहादत के बाद से किशुनीपुर गांव एक तीर्थ स्थल की तरह पूजनीय हो गया है। प्रतिवर्ष 26 जुलाई को यहां भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होता है। इसमें गांव के लोग, क्षेत्रीय नेता और एसएसबी के अधिकारी-जवान शामिल होते हैं।
समय-समय पर एसएसबी की विभिन्न वाहिनियों के नेतृत्व में गांव और स्थानीय कॉलेजों में संगोष्ठियां भी आयोजित की जाती हैं। इन कार्यक्रमों में शहीद के पिता शोकहरण तिवारी और परिवार का सम्मान किया जाता है। युवाओं को सेना और अर्धसैनिक बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता है।
गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में अमित तिवारी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका अनावरण जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया था। यह स्थल अब गांव के राजकीय और सांस्कृतिक उत्सवों का मुख्य केंद्र बन चुका है। लोग यहां शीश नवाकर कार्यक्रमों की शुरुआत करते हैं।
स्थानीय राम सिंहासन किसान इंटर कॉलेज परिसर में भी उनकी तस्वीर और गौरवगाथा को सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किया गया है। क्षेत्र के युवा अमित तिवारी को आदर्श मानते हैं।
प्रेरणा का संदेश
आज की सर्वदलीय सभा में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने वीर अमित तिवारी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने परिवार के प्रति संवेदना और सम्मान व्यक्त किया।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिदानी अमित तिवारी का योगदान अक्षुण्ण रखने के लिए क्षेत्र के विकास के प्रयास जारी रहेंगे। उनकी स्मृति को जीवित रखने के लिए उठाए गए कदम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।
सभा में मौजूद एसएसबी के अधिकारियों ने भी शहीद के परिवार का सम्मान किया और उनके बलिदान को याद किया। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर कार्यक्रम को गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न कराया।
किशुनीपुर गांव अब केवल एक गांव नहीं रह गया है। यह उन वीर सपूतों की याद का प्रतीक बन चुका है जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। अमित तिवारी की कहानी बलिया के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।