Ballia News Today। बिहार के समस्तीपुर जिले के 15 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 मुकाबले में उन्होंने मात्र 19 गेंदों पर अर्धशतक जड़कर सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस तूफानी पारी की बदौलत भारत ने मैच में शानदार जीत दर्ज की।
समस्तीपुर के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के विरुद्ध खेले गए टी-20 मैच में धमाकेदार प्रदर्शन किया। मात्र 15 साल 118 दिन की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टी-20 में सबसे तेज अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
वैभव ने 18 गेंदों में ही अपना अर्धशतक पूरा किया। कुल 19 गेंदों का सामना करते हुए उन्होंने 50 रन बनाए। उनकी इस पारी में चार चौके और चार छक्के शामिल रहे। अर्धशतक लगाते ही अगली गेंद पर वे आउट हो गए।
एक पारी ने बदली तस्वीर
इस उपलब्धि के साथ वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में सबसे कम उम्र में अर्धशतक जड़ने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने दिग्गज सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। सचिन ने 16 साल 213 दिन की उम्र में 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाया था।
वैभव की 263 के स्ट्राइक रेट वाली यह पारी देखते ही बनती है। उन्होंने जिम्बाब्वे के 126 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम को तेज शुरुआत दिलाई।
इंग्लैंड के खिलाफ खराब फॉर्म को किया भुलाया
इससे पहले इंग्लैंड के खिलाफ हुई टी-20 सीरीज में वैभव का प्रदर्शन खासा नहीं रहा था। उन्होंने तीन मैचों में क्रमशः 14, 13 और 15 रन बनाए थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने जोरदार वापसी की और आक्रामक बल्लेबाजी का मुजाहिरा किया।
इशान किशन ने भी निभाई अहम भूमिका वैभव के साथ पटना के इशान किशन ने भी अच्छी पारी खेली। इशान ने 24 गेंदों में 35 रन बनाए, जिसमें तीन चौके और दो छक्के शामिल थे। दोनों बल्लेबाजों की पारियों की बदौलत भारतीय टीम ने लक्ष्य को सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया।
दिग्गजों की सूची में सबसे ऊपर वैभव वैभव सूर्यवंशी अब सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष स्थान पर हैं। सचिन तेंदुलकर (16 साल 213 दिन), शाहिद अफरीदी (16 साल 214 दिन) और मुश्ताक मोहम्मद (17 साल 39 दिन) जैसे दिग्गजों को उन्होंने पीछे छोड़ दिया।
15 साल की उम्र में यह कारनामा कर वैभव सूर्यवंशी ने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के क्रिकेट प्रेमियों को गर्व का मौका दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर क्रिकेट जगत में सराहना हो रही है।
भारतीय टीम की इस जीत में वैभव की पारी निर्णायक साबित हुई। युवा प्रतिभाओं को मौका देने की नीति एक बार फिर सही साबित हुई है।