बलिया। मंगलवार को जिले के बुद्धिजीवियों ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर राज्यपाल को पत्र सौंपा। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को दिए गए इस पत्र के माध्यम से उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर चिंता जताई और हस्तक्षेप की अपील की।
बलिया कलक्ट्रेट में मंगलवार दोपहर करीब दो बजे बुद्धिजीवी वर्ग के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को संबोधित पत्र सौंपा। इस पत्र में रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है।
बुद्धिजीवियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय के कुल 40 भवनों में से 38 को तकनीकी खामियों के आधार पर ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। इस विश्वविद्यालय में वर्तमान में हजारों छात्र अध्ययनरत हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि यह आदेश राजनीतिक द्वेष के चलते लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विश्वविद्यालयों की पहले से ही कमी है। ऐसे में किसी स्थापित संस्थान को इस तरह ध्वस्त करना समाज के मनोबल को प्रभावित करेगा और छात्रों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।
बुद्धिजीवियों ने राज्यपाल से अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और ध्वस्तीकरण के आदेश को रद्द कराने का आग्रह किया।
इस मौके पर एडवोकेट मदूसूदन श्रीवास्तव, मुहम्मद राशिद, इरशाद अहमद, डॉ. एम इलियास, आदिल खां, एडवोकेट रहमत अली खां, लक्ष्मण सिंह, डॉ. एम आजमी, तेज नारायण, एडवोकेट राजेंद्र यादव, रेयाज समेत कई बुद्धिजीवी मौजूद रहे।
बुद्धिजीवियों का कहना है कि विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ध्वस्तीकरण से न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और शिक्षा के अवसर भी कम हो जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल इस अपील पर गौर करेंगे और छात्रों के हित में उचित कदम उठाएंगे।
यह घटनाक्रम रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी विवादास्पद स्थिति को लेकर बलिया में उठी प्रतिक्रिया का हिस्सा है। बुद्धिजीवियों का यह कदम शिक्षा के अधिकार और संस्थागत स्थिरता को लेकर जागरूकता का संकेत देता है।