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अयोध्या संत ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा, भारत में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग

अयोध्या। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने पूरे देश में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यह पत्र 17 जुलाई 2026 को सामने आया।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अपने पत्र में कहा कि इस्लाम एक ऐसी उपासना पद्धति है जो दूसरी पद्धतियों को प्रभावित या समाप्त कर देती है। उन्होंने इस आधार पर राष्ट्रपति से पूरे भारत में नमाज पर रोक लगाने की अपील की।

मांग के पीछे मुख्य कारण

संत ने पत्र में लिखा कि विभिन्न माध्यमों से सनातन समाज को नुकसान पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे आरोपों का जिक्र किया। परमहंस आचार्य का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण सनातन परंपरा को खतरा है। इसलिए उन्होंने राष्ट्रपति से पूर्ण प्रतिबंध की मांग की।

ऐतिहासिक उदाहरण दिए

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अपनी मांग के समर्थन में ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने 16 अगस्त 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे का जिक्र किया। साथ ही 1990 में कश्मीर घाटी में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन का उदाहरण भी दिया।

संत का तर्क है कि इन घटनाओं से पता चलता है कि कैसे एक विशेष उपासना पद्धति दूसरों को प्रभावित करती है। उन्होंने इन संदर्भों के आधार पर राष्ट्रपति से ध्यान देने की अपील की।

मौलाना के बयान पर कड़ा ऐतराज

पत्र में जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मौलाना जर्जिस अन्सारी के हालिया बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। मौलाना ने कथित तौर पर भगवान श्री कृष्ण को नमाजी बताया था। संत ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद से पहले इस्लाम का अस्तित्व नहीं था। इसलिए हिंदू देवी-देवताओं पर ऐसी टिप्पणियां असहनीय हैं।

परमहंस आचार्य ने इस बयान को सनातन आस्था पर हमला बताया। उन्होंने राष्ट्रपति से इस तरह की घटनाओं पर भी संज्ञान लेने की मांग की।

विभिन्न जिहादों का आरोप

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पत्र में विभिन्न रूपों के जिहाद का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और अन्य माध्यमों से सनातन समाज को निशाना बनाया जा रहा है।

संत ने कहा कि इन गतिविधियों के कारण देश में सामाजिक सद्भाव बिगड़ रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पूरे देश में नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर स्थिति को नियंत्रित करने की अपील की।

यह पत्र अयोध्या के प्रमुख संत जगद्गुरु परमहंस आचार्य द्वारा भेजा गया है। तपस्वी छावनी उनके आध्यात्मिक केंद्र के रूप में जानी जाती है। राष्ट्रपति कार्यालय को भेजे गए इस पत्र की अब आगे की कार्यवाही पर नजरें टिकी हुई हैं।

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